आज का विचारजिदंगी की सार्थकता खुद के लिये जीने में नहीं वरन सामाजिक मूल्यों की रक्षा व पीड़ितों के आंसूओं को पोछने में है। मन, वचन, काया में एक रुपता व विचारों में शुद्धता ही सफलता का मूल मंत्र है। सोच दिशा तय करती है और दिशा हमारी दशा तय करती है। इसलिये सार्थक सोच रखें परिणाम भी सार्थक मिलेंगे।

Friday, 7 June 2013

खुशियां ढूंडने से नहीं बांटने से मिलती हैं।


4 comments:

  1. दुर्भाग्य है कि लोग यह नहीं समझ पा रहे हैं और महात्वाकांक्षाओं की अंधी दौड़ में लगे हैं।

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  2. Purohitji pranam
    Please send me paath and indrakshi devi photo at renu.0018@gmail.com

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  3. I want paath @ renu.0018gmail.com

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